Friday, June 11, 2021

कुछ भी बदला नहीं

 कुछ भी बदला
नहीं फलाने
सब जैसा का तैसा है
सब कुछ पूछो
यह मत पूछो
आम आदमी कैसा है

क्या सचिवालय
क्या न्यायालय
सबका वही रवैय्या है
बाबू बड़ा ना
भैय्या प्यारे
सबसे बड़ा रुपैय्या है
पब्लिक जैसे
हरी फसल है
शासन भूखा भैंसा है

मंत्री के
पी.ए. का नक्शा
मंत्री से भी हाई है
बिना कमीशन
काम न होता
उसकी यही कमाई है
रुक जाता है
कहकर फौरन
देखो भाई ऐसा है

मनमाफिक
सुविधाएँ पाते
हैं अपराधी जेलों में
कागज पर
जेलों में रहते
खेल दिखाते मेलों में
जैसे रोज
चढ़ावा चढ़ता
इन पर चढ़ता पैसा है

-कैलाश गौतम

No comments:

Post a Comment