Saturday, May 08, 2021

खोजें छोर-किनारा


मज़लूमों की
छत के नीचे
मिले नौकरी-चारा 
ऐसा हो
संघर्ष हमारा।

सबको
आदर-भाव
सौंप दें
समता-बीज पड़ें 
द्वेष-घृणा
चिन्तन से
निकलें
उन्नत पाँव बढ़ें
कृषक
मजूरों के
जीवन में
लौटे हर्ष दुबारा
ऐसा हो
संघर्ष हमारा।

एक वर्ण 
मानवता पा ले
जाति भेद
से दूरी
ऊँच-नीच की
कारा टूटे
कुछ भी
हो मजबूरी 
रार बिना मिल
जाने वाला
खोजें छोर-किनारा
ऐसा हो 
संघर्ष हमारा।

आंँस चटकती
काँच सरीखी
हिम्मत मांँगे पानी
रोज़नदारी 
लिये आस्था
पूजे गाँव गिरानी
नाक सभी
चेहरों पर आये
ब्याहें सपन कुँवारा
ऐसा हो
संघर्ष हमारा।

-रामकिशोर दाहिया

No comments:

Post a Comment