कथनी से करनी तक
है कितना कमजोर पिता"चोरी है अपराध"
सीख देता है चोर पिता ।
घर से लेकर सरकारों तक
यही फजीहत है
शिक्षक, नेता, पिता, धर्म का
काम नसीहत है
कूटनीति से खींच रहा है
घर की डोर पिता ।
केवल माँ का प्यार प्राप्त कर
बच्चे बड़े हुए
बच्चे गलत पिता के सम्मुख
तनकर खड़े हुए
उस दिन से अनुशासन पर
देता है जोर पिता ।
घर से भागे हुए पिता ही
देश चलाते हैं
इसीलिए वे
जिम्मेदारी से कतराते हैं
घर से लेकर सरकारों तक
हैं हर ओर पिता ।