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January 22, 2016

पिता

  पिता की लत थी
कि वह बीड़ी जलाते थे
आग अंदर थी
जिसे अक्सर बुझाते थे

नहीं छूते थे
कभी सिगरेट की डिबिया
ली नहीं कोई
दवाई की कभी टिकिया
नीम की पतई
व तुलसी-दल चबाते थे

छी किये खैनी
नहीं था पान से नाता
बंदगी प्यारी
रहा बस काम से नाता
सोरठी जब तब
अलावों पर सुनाते थे

खूब खाते थे
टिकोरा की बनी चटनी
भजन गाते थे
लगी हो खेत में कटनी
बीच में रुक-रुक
बुझौवल भी बुझाते थे
पिता की लत थी
कि वह बीड़ी जलाते थे

-शिवानन्द सिंह सहयोगी