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January 15, 2013

धूप के तेवर

हर गरल पीयूष बन जाता
कंठ विषपायी अगर होते

सर्पदंशों से चुभे रिश्ते
नागफनियों-से उगे नाते
बन्द हैं मन की दराजों में
यातनाओं के बहीखाते

उम्र सहसा गुनगुना उठती
अश्रु चौपाई अगर होते

धुंध है, गहरा धुँधलका है
सांस के उजड़े तपोवन में
सैकड़ों षडयन्त्र लिपटे हैं
आयु के भयभीत चन्दन में

धूप के तेवर बदल जाते
आप अमराई अगर होते।

-सत्येन्द्र कुमार रघुवंशी