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August 7, 2018

मैं कैसे बदलूँ

मैं कैसे बदलूँ
जैसे दिन रोज़ बदलता है

रोज़ बदल जाती
जैसे कैलेण्डर की तारीख़
राजभवन की अक्सरहाँ
बदला करती है सीख
रंग बदलते
मौसम से मन बहुत दहकता है

खरबूजे को देख
बदल लेता खरबूजा रंग
जगत बदलते ही गिरगिट का
होता दूजा रंग
कहीं बरसते मेघ
कहीं पर भूतल जलता है

बदली हुई हवा के
रुख की हो पहले पहचान
और नदी की गहराई का
थोड़ा भी अनुमान
सोचे-समझे बिना
वनों में कौन टहलता है

-नचिकेता

राजा आएँगे

दीन-दलित के कीर्तन गाओ
राजा आएँगे
तोरन-बन्दनवार सजाओ
राजा आएँगे

उद्घाटन होगा
नूतन श्मशान घरों का
होगा मंगल-गान मूक
अँधे, बहरों का
फरियादी को दूर भगाओ
राजा आएँगे

माला लेकर
खड़े हुए तस्कर, अपराधी
बड़े सेठ के घर में है
बेटी की शादी
नयी प्रगति का जश्न मनाओ
राजा आएँगे

बिन त्योहार मनाई जाएगी
दीवाली
खूब बहेगी महँगी मदिराओं
की नाली
जनहित के नगमे दुहराओ
राजा आएँगे

छोड़ी जाएगी
आश्वासन की फुलझड़ियाँ
चीख़ों के होठों पर हों
गीतों की लड़ियाँ
कमलछाप झण्डा लहराओ
राजा आएँगे

-नचिकेता