Showing posts with label * शीलेन्द्र कुमार सिंह चौहान. Show all posts
Showing posts with label * शीलेन्द्र कुमार सिंह चौहान. Show all posts

December 6, 2011

हम बबूल हैं

हम बबूल हैं
पर अच्छे हैं
कठिन परिस्थिति में भी अपने
सीने तान खड़े रहते हैं

ऊसर बंजर में भी उगना
उगने पर हँस हँस कर बढ़ना
है विशिष्ट गुणधर्म हमारा
वेद पुराण सभी कहते हैं

नख से शिख तक उपयोगी हैं
निर्विकार हैं हम योगी हैं
मौसम बेमौसम हो फिर भी
फूला और फला करते हैं

दृढ़ता में औरों से आगे
निर्धन की कथरी के तागे
पुरवा चले, चले पछुवाई
हिलें न पाँव अडिग रहते हैं

-शीलेन्द्र कुमार सिंह