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June 15, 2018

तुम अभी कुछ देर ठहरो

मैं धरातल पर घड़ी भर
पाँव धरना चाहता हूँ
कल्पनाओं !
तुम अभी कुछ देर ठहरो

मैं बहुत ही थक गया हूँ
दूर से मुझको अकेले
लौटकर आना पड़ा है
मैं जिधर से जा चुका था
क्या बताऊँ क्यों मुझे फिर से
उधर आना पड़ा है
कुछ समय तक मैं
स्वयं से बात करना चाहता हूँ
व्यस्तताओं !
तुम अभी कुछ देर ठहरो

मैं जिन्हें अपना चुका था
आज मैं यह जान पाया
वे नहीं मेरे हुए हैं
जो दबे थे खो चुके थे
वे अभाषित प्रश्न मुझको
आज तक घेरे हुए हैं
रिक्तियों को मैं
किसी भी भाँति भरना चाहता हूँ
वर्जनाओं !
तुम अभी कुछ देर ठहरो

मैं अटल कर्त्तव्य पथ पर
छोड़कर फिर आ गया हूँ
अनमने अधिकार सारे
मौन मुझको रुच रहा है
अब नहीं सुनने कभी भी
प्रश्न या उत्तर तुम्हारे
पत्थरों के बीच से अब
मैं गुज़रना चाहता हूँ
देवताओं !
तुम अभी कुछ देर ठहरो

-ज्ञान प्रकाश आकुल

October 2, 2017

रामलीला हो चुकी है


रामलीला हो चुकी है
दर्शकों के दल घरों में खो गये

और पात्रों ने उतारे
मुकुट, बंदर के मुखौटे
काम जिनके पास था तो
काम पर वे लोग लौटे
धो लिया चेहरा ज़रा सा
राक्षस सब आदमी से हो गये

उड़ गयी रंगत गुलाबी
खुल गया फिर रंग भूरा
फिर ग़रीबी मुस्करायी
दिक्कतों ने खूब घूरा
लौटने का मन नहीं था
पर ज़रूरत ने बुलाया तो गये

क्या विजेता क्या पराजित
मंच के नीचे खड़े हैं
धनुष,रावण के खडग सब
एक झोले में पड़े हैं
आँख में आंसू भरे हैं
राम रावण फिर दरी पर सो गये

-ज्ञान प्रकाश आकुल