Saturday, December 17, 2011

तू मन अनमना न कर अपना




भारत भूषण
[ ८ जुलाई १९२९ - १७ दिसम्बर २०११ ]
  -भारत भूषण
तू मन अनमना न कर अपना
इसमें कुछ
दोष नहीं तेरा
धरती के
कागज पर मेरी
तस्वीर अधूरी रहनी थी
शायद मैंने गत जनमों में
अधबने नीड़ तोड़े होंगे
चातक का स्वर
सुनने वाले बादल
वापस मोड़े होंगे
ऐसा अपराध हुआ होगा
जिसकी फिर
क्षमा नहीं मिलती
तितली के पर नोंचे होंगे
हिरनो के दृग फोड़े होंगे
अनगिनती कर्ज चुकाने थे
इसलिए जिन्दगी भर
मेरे तन को
बेचैन भटकना था
मन में
कस्तूरी रहनी थी।
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[सुप्रसिद्ध गीतकार भारत भूषण ने शनिवार १७ दिसम्बर २०११ को दिन के ३ बजकर ५० मिनट पर इस संसार को हमेशा के लिए छोड़ दिया। नवगीत परिवार की ओर से विनम्र श्रद्धाजंलि। ]