Saturday, July 30, 2011

मनचाहे सपनों को

- अश्वघोष
मनचाहे सपनों को
कोख में दबा
बंजारे दिन
हो गए हवा

नयनों के गेह से
गूँगा विश्वास
सहमा-सा देख रहा
अनुभव की प्यास
तन-मन में रमी हुई
नींद की दवा

सूली पर लटके-से
लगते हैं दिन
चिड़ियों-सी उड़ जातीं
रातें दुलहिन
सड़कों पर बिखरा है
मौन का रवा
हो गए हवा ।


16 comments:

मनोज कुमार said...

नवगीत अभिधेयात्मक एवं व्यंजनात्मक शक्तियों को लिए हुए है।

चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ said...

आपकी इस सुन्दर प्रविष्टि की चर्चा कल दिनांक 01-08-2011 को चर्चामंच http://charchamanch.blogspot.com/ पर सोमवासरीय चर्चा में भी होगी। सूचनार्थ

sushma 'आहुति' said...

बहुत ही खुबसूरत शब्दों का समायोजन....

S.N SHUKLA said...

सुन्दर नवगीत

डा० व्योम said...

मनोज कुमार जी ! डा० अश्वघोष जी के नवगीत पर आपकी टिप्पणी पढ़कर प्रसन्नता हो रही है।

डा० व्योम said...

चन्द्रभूषण मिश्र जी ! ब्लाग पर प्रकाशित सामग्री की चर्चा करने का मंच देकर आप एक अच्छा कार्य ही नहीं कर रहे हैं बल्कि लेखन और अच्छे लेखन के लिए रचनाकारों को प्रोत्साहित भी कर रहे हैं। दरअसल हमारे यहाँ वरिष्ठ रचनाकार अभी भी इण्टरनेट से दूर ही हैं, उन्हें इस मैदान में लाने के लिए जो किया जाना चाहिये चर्चा मंच के बहाने आप उसे बखूबी निभा रहे हैं। मेरा पूर्ण सहयोग आपके साथ है।

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

बहुत खूबसूरत रचना ... सुन्दर अभिव्यक्ति

सागर said...

sunder shabdo se saji rachna...

vidhya said...

आपको मेरी हार्दिक शुभकामनायें
बहुत ही खुबसूरत शब्दों का समायोजन....
लिकं हैhttp://sarapyar.blogspot.com/
अगर आपको love everbody का यह प्रयास पसंद आया हो, तो कृपया फॉलोअर बन कर हमारा उत्साह अवश्य बढ़ाएँ।

S.M.HABIB said...

बहुत सुन्दर गीत....
सादर....

डा० व्योम said...

आप सभी का डा० अश्वघोष के नवगीत पर प्रतिक्रिया के लिये आभार।

Dorothy said...

खूबसूरत अभिव्यक्ति. आभार.
सादर,
डोरोथी.

ana said...

man ko bha gayi ye geet...wah

udaya veer singh said...

A bunch of good words,of heart & possessive mind ... / thanks ji

Dr.Ashutosh Mishra "Ashu" said...

manbhavan geet...

ईप्सा said...

बहुत सुन्दर नवगीत है।