Saturday, September 09, 2017

माँ


जब गया मैं घर
अचानक याद आई माँ

याद आई
एक सरिता
दौड़ती अविराम
याद आई
क्ल्पवृक्षी
एक शीतल छाँव
टूटता छप्पर
अचानक याद आई माँ

याद आई
एक भाषा
लाड़ से भरपूर
याद आई
एक दृष्टि
वृष्टि से मजबूर
काँपते अक्षर
अचानक याद आई माँ

याद आई
एक ममता
फूल में मकरंद
याद आई
एक घाटी
तीर्थों के संग
मन हुआ निर्झर
अचानक याद आई माँ

-डा० अश्वघोष
9897700267