Thursday, January 21, 2016

खेत-खेत में खडे बिजूके

खेत-खेत में खडे बिजूके
करते रखवाली
उनकी पेटी मे लटके हैं
कारतूस खाली
सीधे-साधे थलचर-नभचर
उनसे डरते हैं
नहीं खेत में घुसने की वे
हिम्मत करते हैं
उजियारी हों या फ़िर चाहे
रातें हों काली
किंतु वहीं चालाक जानवर
मौज़ उडाते हैं
फसलें चरते और ठहाके
खूब लगाते हैं
मानो उनके हिस्से में हो
सारी हरियाली
शेष बचे अनाज के दाने
चूहे कुतर रहे
अब तो लहराती फसलों के
सपने बिखर रहे
और किसान नींद में डूबा
बजा रहा ताली.

-शैलेन्द्र शर्मा

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