Saturday, September 12, 2015

कक्षा अध्यापक

-डा० भारतेन्दु मिश्र

मेरी कक्षा में पढ़ते हैं
बच्चे पूरे साठ
मेरे लिए सभी बच्चे हैं
नई तरह के पाठ

कुछ पाठों में भावसाम्य है
कुछ पाठों में कठिनाई है
एक पाठ बिल्कुल सीधा है
एक पाठ बिल्कुल उलझा है
इनमें कुछ सीधे निबंध हैं
संस्मरण कुछ जटिल छंद हैं

किसी पाठ में ठाठ-बाट है
किसी पाठ पर रोना आता
इन सब में हैं कुछ कविताएँ
कुछ नाटक कुछ और कथाएँ
कुछ अनबूझी हुई ॠचाएँ
कुछ पहाड़ तो कुछ सरिताएँ

मुसकाते गपियाते बच्चे
लगते हैं सब मन के सच्चे
रोज इन्हें खुलकर पढ़ता हूँ
कुछ अपने भीतर गढ़ता हूँ

नहीं सिखा पाता हूँ इनको
मैं किताब की सारी बातें
नहीं जानता कितना मुझे
पढ़ाना आता है
मुझको तो
बस इन बच्चों को
पढ़ना भाता है ।

-डा० भारतेन्दु मिश्र
[अनुभव की सीढ़ी से]

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