Sunday, February 05, 2012

धूप से संवाद



-संजीव गौतम

धूप से
संवाद करना
आ गया है

उम्र भर
सच को सराहा
सच कहा
झूठ का
हर वार
सीने पर सहा
क्या डरायेंगे
हिरण कश्यप हमें
स्वयं को
प्रहलाद करना
आ गया है

धूल वाले रास्ते
हक के सबब
राजमार्गों से करेंगे
होड़ अब
कान वाले
खोलकर
सुन लें सभी
मौन को
प्रतिवाद करना
आ गया है