Sunday, February 05, 2012

धूप से संवाद



-संजीव गौतम

धूप से
संवाद करना
आ गया है

उम्र भर
सच को सराहा
सच कहा
झूठ का
हर वार
सीने पर सहा
क्या डरायेंगे
हिरण कश्यप हमें
स्वयं को
प्रहलाद करना
आ गया है

धूल वाले रास्ते
हक के सबब
राजमार्गों से करेंगे
होड़ अब
कान वाले
खोलकर
सुन लें सभी
मौन को
प्रतिवाद करना
आ गया है

18 comments:

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) said...

बहुत ही अच्छा गीत है।

सादर

Dr. Mahendra Bhatnagar said...

प्रभावशाली कविता! प्रसंग-गर्भत्व ने रचना को एकेडेमिक बनाया है। कथन-भंगी में ताज़गी है।
*महेंद्रभटनागर
E-Mail : drmahendra02@gmail.com
Phone : 0751-4092908

Dr. Mahendra Bhatnagar said...

प्रभावशाली कविता! प्रसंग-गर्भत्व ने रचना को एकेडेमिक बनाया है। कथन-भंगी में ताज़गी है।
*महेंद्रभटनागर
E-Mail : drmahendra02@gmail.com
Phone : 0751-4092908

चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति
आपकी इस सुन्दर प्रविष्टि की चर्चा कल दिनांक 06-02-2012 को सोमवारीय चर्चामंच पर भी होगी। सूचनार्थ

अरूण साथी said...

अतिसुन्दर

Naveen Mani Tripathi said...

oj poorn prabhavshali rachana bahut achhi lagi ...badhai.

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) said...

कल 07/02/2012 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
धन्यवाद!

veerubhai said...

अभिनव शैली में लिखा गया शानदार नवगीत .अर्थवान भावपूर्ण .

Swati Vallabha Raj said...

bahut hi sundar...

vidya said...

बहुत सुन्दर...प्रभावशाली प्रस्तुति..
बधाई.

गिरिजा कुलश्रेष्ठ said...

धूप से यूँ ही संवाद होता रहे । बहुत सुन्दर गीत

गिरिजा कुलश्रेष्ठ said...

धूप से यूँ ही संवाद होता रहे । बहुत सुन्दर गीत

Aditya said...

Behtareen geet..
antim banktiyaan to ekdum josh se bhar gai.. :)

palchhin-aditya.blogspot.in

रचना दीक्षित said...

मौन को
प्रतिवाद करना
आ गया है.

प्रखर भाव. सुंदर प्रस्तुति.

anugoonj said...

बहुत प्यारा नवगीत है

anugoonj said...

बहुत प्यारे और भावपूर्ण नवगीत के लिए वधाई

vandana said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति

anugoonj said...

very good