Sunday, October 02, 2011

कितना कमजोर पिता


-जहीर कुरेशी

कथनी से करनी तक
है कितना कमजोर पिता
"चोरी है अपराध"
सीख देता है चोर पिता ।

घर से लेकर सरकारों तक
यही फजीहत है
शिक्षक, नेता, पिता, धर्म का
काम नसीहत है
कूटनीति से खींच रहा है
घर की डोर पिता ।

केवल माँ का प्यार प्राप्त कर
बच्चे बड़े हुए
बच्चे गलत पिता के सम्मुख
तनकर खड़े हुए
उस दिन से अनुशासन  पर
देता है जोर पिता ।

घर से भागे हुए पिता ही
देश चलाते हैं
इसीलिए वे
जिम्मेदारी से कतराते हैं
घर से लेकर सरकारों तक
हैं हर ओर पिता ।

5 comments:

रचना दीक्षित said...

पिताओं पर इतना कुपित होना सही है क्या. यह सर्व सत्य नहीं है.

S.N SHUKLA said...

सुन्दर और सार्थक रचना के लिए बहुत- बहुत आभार

Dr. Mahendra Bhatnagar said...

ऐसे पिता अक़्सर शराबी होते हैं। कविता में सचाई है। ऐसा हम अपने इर्द-गिर्द देखते हैं। रचना में विषय की नवीनता भी दृष्टव्य है।
*महेंद्रभटनागर

नवगीत-पाठशाला said...

डा० महेन्द्र भटनागर जी आपका बहुत आभार टिप्पणी के लिये। रचना दीक्षित और शुक्ला जी आप सभी का आभार।

Bhavana Tiwari said...

नवगीत में जिस प्रकार से आज के समाज में विस्तारित होती कुरीतियों को शब्द दिए हैं वह सराहनीय है .और अंततः राजनीति को छूते हुए कितनी सरलता से चित्र प्रस्तुत किया ...वाह वाह