Thursday, September 29, 2011

बांध गई मुस्कान किसी की

-विजय किशोर मानव












बांध गई मुस्कान किसी की
घेरों में
बिछुए से पड़ गए
कुआंरे पैरों में

धूप-धूप हो गईं
शिराएं
रक्तचाप छू गईं
हवाएँ
शब्द-वृत्त मदहोश
छुअन के
अर्थ-बोध
तुलसी-चंदन के
सांसें जैसे बंधी
सतपदी फेरों में ।

सूखे दिन
आसाढ़ हो गए
सपने तिल से
ताड़ हो गए
सन्नाटे लिख गए
समास अंधेरों में ।


( पूर्व कार्यकारी संपादक- कादम्बिनी )