Monday, September 26, 2011

सोख न लेना पानी

-डॉo कुँअर बेचैन







[ डॉ० कुँअर बेचैन ]





सूरज !
सोख न लेना पानी !

तड़प तड़प कर मर जाएगी
मन की मीन सयानी !
सूरज, सोख न लेना पानी !

बहती नदिया सारा जीवन
साँसें जल की धारा
जिस पर तैर रहा नावों-सा
अँधियारा उजियारा
बूँद-बूँद में गूँज रही है
कोई प्रेम कहानी !
सूरज, सोख न लेना पानी !


यह दुनिया पनघट की हलचल
पनिहारिन का मेला
नाच रहा है मन पायल का
हर घुँघुरू अलबेला
लहरें बाँच रही हैं
मन की कोई बात पुरानी !
सूरज, सोख न लेना पानी !


-डॉ० कुँअर बेचैन

3 comments:

रविकर said...

सुन्दर प्रस्तुति पर
बहुत बहुत बधाई ||

रेखा said...

वाह ....बहुत सुन्दर

चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति वाह!